9.6.10

ये दीदी है या कोई दादा।।।



ये दीदी है या कोई दादा
जिसने अकेले किया जनता से वादा
भेस बनाया बिल्कुल सादा
प्रदेश की 36 पालिकाओं को अकेले काटा
अगले साल के विधानसभा के फाइनल को
इस साल सेमीफाइनल जीत कर
साफ कर दिया अपना इरादा...
तृकां की सर्वेसर्वा और रेलवे की महामहिम
बंगाल में इतनी जुझारू
लेकिन प्लेटफॉर्मों पर वो गईं थम
अपनी जीत की है ख़शी बहुत
पर बेगुनाहों के मरने पर नहीं कोई ग़म
नाम है ममता और काम है जनता
मेल है इनमें बहुत ही कम
वाम का मोर्चा भ्रष्टाचार लील गया
कॉग्रेस का सेतारा भी बंगाल में हिल गया
तृकां का सिक्का कुछ ज़्यादा चल गया
मरने कटने पर ममता नहीं जिन्हें
उनका ज़मीर कब का सो गया
अपने नेता बनने पर दीदी को क्यों ग़ुमान हो गया
ये दीदी है या कोई दादा ।।।