1.12.10

बेज़ार



पत्थर सा बेज़ार हो गया हूं
किस्मत से बेकार हो गया हूं
यूं ही नहीं कहता मैं कुछ
क्योंकि कितना मैं बर्बाद हो चुका हूं
बाज़ार में नहीं क़ीमत अब मेरी
मैं तो मुफ्त की मार हो गया हूं।।।