17.1.10

मां



मां होती है क्या ? किसी को है पता ?
देवों का प्रतिबिम्ब ही मां का स्वरूप है,
देवयुग से मां का रूप ऐसे ही छाया है,
तभी आज हर बच्चे पर मां की ममता का साया है,
मुश्किल में मां का नाम लेकर ही हर बच्चा सफल हो पाया है,
हमको जन्म देकर जीवन के बारे में बताती है,
पहले गोद में लेती है, फिर चलना सिखाती है,
कभी मारती, तो कभी मनाती है,
कभी रूठती, तो फिर खुद ही मान जाती है।
अंधेरे को दूर करके, रौशनी का पता बताती है
हमारा पेट भरने के चक्कर में, खुद भूखी सो जाती है,
जीवन में बेटा नेक बनना , ये मां ही तो सिखाती है।
मां होती है क्या ? किसी को है पता ?

कलियुग के इस दौर में हम मां को भूल जाते हैं,
जिसने हमें चलना सिखाया, उसे ही बीच सड़क छोड़ आते हैं,
भूल तो करते हैं, और उसे भी भूल जाते हैं,
इतने सब कुछ पर भी, मां कुछ नहीं भूल पाती है,
फिर भी मां अपने हर बच्चे पर बस ममता ही बरसाती है,
मां की ममता और विनम्रता उसकी पहचान है,
मां चाहे तेरे जितने भी नाम हैं,
उन सबको मेरा सलाम है, और कोटि-कोटि प्रणाम है।
मां होती है क्या ? किसी को है पता ?