
मां होती है क्या ? किसी को है पता ?
देवों का प्रतिबिम्ब ही मां का स्वरूप है,
देवयुग से मां का रूप ऐसे ही छाया है,
तभी आज हर बच्चे पर मां की ममता का साया है,
मुश्किल में मां का नाम लेकर ही हर बच्चा सफल हो पाया है,
हमको जन्म देकर जीवन के बारे में बताती है,
पहले गोद में लेती है, फिर चलना सिखाती है,
कभी मारती, तो कभी मनाती है,
कभी रूठती, तो फिर खुद ही मान जाती है।
अंधेरे को दूर करके, रौशनी का पता बताती है
हमारा पेट भरने के चक्कर में, खुद भूखी सो जाती है,
जीवन में बेटा नेक बनना , ये मां ही तो सिखाती है।
मां होती है क्या ? किसी को है पता ?
कलियुग के इस दौर में हम मां को भूल जाते हैं,
जिसने हमें चलना सिखाया, उसे ही बीच सड़क छोड़ आते हैं,
भूल तो करते हैं, और उसे भी भूल जाते हैं,
इतने सब कुछ पर भी, मां कुछ नहीं भूल पाती है,
फिर भी मां अपने हर बच्चे पर बस ममता ही बरसाती है,
मां की ममता और विनम्रता उसकी पहचान है,
मां चाहे तेरे जितने भी नाम हैं,
उन सबको मेरा सलाम है, और कोटि-कोटि प्रणाम है।
मां होती है क्या ? किसी को है पता ?
3 comments:
Superb, this is reality :-)
मां
उपमा नहीं होती
मां ...हिमालय से भी ऊंची होती है..............
लेकिन
पाषाण की तरह कठोर नहीं
सागर
से भी गहरी होती है मां
लेकिन
सागर जैसी खारी नहीं
भगवान
को भी जन्म देती है मां
लेकिन
भगवान की तरह दुर्लभ नही होती...
मां
तो वायु से भी ज्यादे गतिशील है....
पर
अदृश्य बिल्कुल नहीं
दिखती
रहती है हरदम
हम
सब के बीमार होने पर
गुमसुम
बैठी सिरहाने
माथे
पर हाथ फेरते.....
लम्बी
उम्र की कामना करते ....
यह
शाश्वत सत्य है...
मां
उपमा नहीं हो सकती
क्योंकि
कोई नहीं है
मां
के समान
किससे
करें हम उपमा उसकी............
मां
...मां ...होती है
सिर्फ
मां ....
मां
उपमा नहीं होती
माँ सिर्फ शब्द नहीं अहसास है
माँ में ममता की प्यास है
माँ से हर सही सुंदर है
माँ से ही घर मंदिर है
माँ न कोई दूजा है
माँ है प्यार माँ पूजा है
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