13.5.10

नकेल कसनी है मुझे।।।



नकेल कसनी है मुझे
आज के व्हशी समाज की
स्कूलों में बढ़ती फीस के मिजाज़ की
सरकारी दफ्तरों के कामकाज की
पंचायतों के बेमानी अंदाज़ की

नकेल कसनी है मुझे
फालतू के बाज़ारवाद की
गिरते मौलिक अधिकार की
तार-तार होते रिश्तों के धार की
आस्था से खिलवाड़ की
गिरते सुर और साज़ की

नकेल कसनी है मुझे
आतंकवाद की आग की
खेल से खिलवाड़ की
काले कारोबार की
गुंडों के विस्तार की
पैसों की गुहार की
और पनपते भ्रष्टाचार की

नकेल कसनी है मुझे
पुलिस के व्यापार की
गुस्से और तक़रार की
लड़कियों के व्यापार की
बचपन पर पड़ते भार की
और नेताओं के दुलार की।।।

12.5.10

मैं तेरे अक्स में ख़ुद को ढ़ूंढ़ता हूं ।।।



मैं तेरे अक्स में ख़ुद को ढ़ूंढ़ता हूं
तेरी परछाई की इकाई में
ख़ुद को बुनता हूं ।
तेरी कहानी में
ख़ुद के शब्द ढूंढ़ता हूं ।
तेरे अफसाने से
मैं फसाना बन गया हूं ।
तेरे यूं ही कहने से
मैं दीवाना बन गया हूं ।
मैं तेरे अक्स में ख़ुद को ढ़ूंढ़ता हूं ।।

तेरे हल्का गुनगुनाने से
एक गाना बन गया हूं ।
तेरी यादों की फहरिस्त में
पहरों बेसुद सा रहता हूं ।
तेरे छूटने के डर से
ख़ुद से जूझता हूं ।
तेरी तस्वीर के साथ
मैं ख़ुद को भूलता हूं ।
तेरे आने की आहट से
फिर ज़िन्दा हुआ हूं ।
मैं तेरे अक्स में ख़ुद को ढ़ूंढ़ता हूं ।।

11.5.10

पुरानी यादें खर्च करना चाहता हूं



पुरानी यादें खर्च करना चाहता हूं
मैं फिर से सबसे मिलना चाहता हूं
याद आता है वो दौर---
वो तस्वीर खिंचवाने की ललक
वो बात-बात पर लड़ने की सनक
वो धुंधली मैडल की चमक
वो चलना पगडंडी पर छोड़ के सड़क
वो Meeting Point का मज़ा
वो Bike से गिरने की सज़ा
वो पापा का समझाना
और मेरा हर बात पर सिर झुकाना
वो करना घंटों तक बक-बक
और चलना इतना कि जाना थक
पुरानी यादें खर्च करना चाहता हूं
मैं कुछ कहना चाहता हूं।।।

रहना हमेशा जोश से लबरेज़
करना कारनामे हैरतअंगेज़
वो देखना टीवी पर फैशन बार-बार
वो समझना खुद को बड़ा सुपरस्टार
वो सुनना गाना इतना तेज़
कि हिल जाए मेरे पड़ोसी की मेज़
वो Plan बनाना लड़की को प्रपोज़ का
लेकिन फिर कहना ये क़िस्सा है रोज़ का
वो बताना नौकरी का Burden
और कहना मैं तो हूं परेशान हरदम
वो करना सुबह शाम पार्टी
वो मानना खुद को Smarty
पुरानी यादें खर्च करना चाहता हूं
मैं कुछ कहना चाहता हूं।।।

10.5.10

पंख



अपने हिस्से की खुशी तो सबको प्यारी है
जीवन में नेक काम करने की अब किसकी बारी है
अपने हिस्से की धूप और अपने हिस्से की छांव हो
तमन्नाएं हो पूरी बस यही भाव हो
बेघर को घर बूढ़े को सहारा पाना है
लेकिन अभी बच्चों को तो नया सपना दिलाना है
नीयत नेक है और है हौंसला भी
ज़मीर अभी ज़िन्दा है वो नहीं गिरा अभी
कटी धारा को जोड़ा जिसने
सपनों को इतने पंख दिए
काम किए बस काम किए हैं
बस यूं ही आज़ाद हुए
आज़ाद न्यूज़ सबकी आवाज़ ।।