26\ 11 जोश है..... जुनुन है.... और है हौंसला भी,
नहीं हैं तो कुछ अपने
जो थोड़े से खफा
हैं क्यों हैं वो अलग...... और रूठे हैं अभी भी,
नहीं मिला इंसाफ.... तो क्या जीना नहीं किए हैं,
जीना है मजबूरी.... ये जानते वही हैं,
जिनके आंगन का फूल... कोई तोड़ ले गया है,
हिन्दुस्तानी हम हैं.... जो हर पल करते हैं सहन,
ना जाने कब तक.... इन धमाकों को करना होगा दफन,
सब कुछ है याद.... सब है मेरे ज़हन,
कैसे मैं मिटाऊं .... अब ये उनका वहम,
नहीं जीते हो..... नहीं जीतोगे,
ये है....हमारा करम
अब तो खोलो आंखें...... और मिटालो भ्रम,
ये है हिन्दोस्तान...ये है हमारा चमन,
मिले हैं संस्कार... और हम करते है नमन,
हाथ जोड़ना हमारी कमजोरी नहीं है,
ये बात है जुरुरी.... इसमें कोई चोरी नहीं है,
अब तो सुधर जाओ,
और छोड़ दो काले कुर्कम,
वरना मिटेगो ऐसे...
कि नक्शे पर मिलेगा नहीं वतन
है कसम..... है कसम.... है कसम


