28.12.09

26\ 11

26\ 11

जोश है..... जुनुन है.... और है हौंसला भी,
नहीं हैं तो कुछ अपने
जो थोड़े से खफा
हैं क्यों हैं वो अलग...... और रूठे हैं अभी भी,
नहीं मिला इंसाफ.... तो क्या जीना नहीं किए हैं,
जीना है मजबूरी.... ये जानते वही हैं,
जिनके आंगन का फूल... कोई तोड़ ले गया है,
हिन्दुस्तानी हम हैं.... जो हर पल करते हैं सहन,
ना जाने कब तक.... इन धमाकों को करना होगा दफन,
सब कुछ है याद.... सब है मेरे ज़हन,
कैसे मैं मिटाऊं .... अब ये उनका वहम,
नहीं जीते हो..... नहीं जीतोगे,
ये है....हमारा करम
अब तो खोलो आंखें...... और मिटालो भ्रम,
ये है हिन्दोस्तान...ये है हमारा चमन,
मिले हैं संस्कार... और हम करते है नमन,
हाथ जोड़ना हमारी कमजोरी नहीं है,
ये बात है जुरुरी.... इसमें कोई चोरी नहीं है,
अब तो सुधर जाओ,
और छोड़ दो काले कुर्कम,
वरना मिटेगो ऐसे...
कि नक्शे पर मिलेगा नहीं वतन
है कसम..... है कसम.... है कसम


27.12.09

एक पहल


एक पहल

क़दम दर क़दम बढ़ते चले हम...
रास्ता कठिन था मगर ना रूके हम
था हौंसला भी और साथ में जुनून था
मगर कहना किसको ये तो दिल की लगी है
देर से सही पर ये आग भी जली है
हवाएं तक चलीं पर ये बुझ ना सकी है
कपकपी भी छूटी पर वो थम सी गयी है
समाज की बुराई अब किससे झुपी है
रास्ता बड़ा था और लम्बा भी मिला है
मगर चलना मुझको पगडंडी पर पड़ा है
प्रण भी किया और संकल्प भी लिया है
समाज की बुराई मिटाने का जिम्मा किया है
की है पहल और पूरा भी करेंगे
अपने इस सफरनामे को एक नाम दिया है
एक पहल.....एक पहल ।।।

स्लमडॉग मिलिनेयर



स्लमडॉग मिलिनेयर

ये ग्लानि है या फिर कोई कहानी है,
ये कैसी निशानी है जो तमाचों की ज़ुबानी है,
देश पर करें नाज़ या क्या कहें आज,
इसने तो बनाया ये देश कमियों का सरताज,
क्या है ये राज़ कोई तो बताए आज,
अगर ये बनाता कोई हिन्दुस्तानी फिल्म-
तो फिर आलोचक कितने करते उस पर ज़ुल्म,
नकारते, धित्कारते, और फटकारते...
उसे कभी ना दोबारा...
ये फिल्म बनाने की सलाह दे मारते
नीचा दिखाया भी और गिराया भी,
पर ये शाने तिरंगा झुका-2 सा फहराया भी,
ये जय हमारी है-
या इसमें किसी ने नीयत मारी है,
रहमान ने कितनी अच्छी बनाई है धुन,
हमने कहा तू सुन-तू सुन-तू सुन ।
Daniel Boyle की ये नई कहानी,
हमारे लिए है कितनी पुरानी,
अब तो ये जिसने भी देखी,
उसने हमारी छवि ऐसी ही मानी,
सच में कितनी दर्दनाक है ये कहानी,
क्या देश पर करें नाज़,
या फिर क्या कहें आज,
कौन है वो ?
और कैसे तैयार करता है पैमाने...
लेकिन एक बात तो तय है,
कि हमसे कहीं ज़्यादा हैं वो सयाने।।

21.12.09

मेरी कहानी





मेरी कहानी...

ये कैसा उफान है.... और कौन सा तूफान है,


मन कुछ विचलित..... और थोड़ा परेशान है,

आज सुबह से ही.... मन नहीं लग रहा

दिलो दिमाग पर छाया.... कोई शैतान लग रहा,

थोड़ा काम भी किया... पर छुटकारा ना पाया,

जब हताश हुआ फिर से... तो लगा जैसे वो साया ही बन आया,

सोचता हूं..नाकामयाबी की इस काली परछाई से कैसे पीछा छुड़ाऊं,

कौन सा करूं जतन...जो उसकी कै़द से अपने को बचाऊं,

सोचा कभी भागू यहां से.... या सब कुछ भूल जाऊं,

पर कोई ये तो बताए...कि इस सच्चाई से मैं कैसे पीछा छुड़ाऊं,

अच्छा या बुरा..... सब किस्मत का खेल है,

पर ये नाचीज़ तो.... हमेशा हुआ इस खेल में फेल है,

टूटा भ्रम मेरा भी ....जब सामने खाई मिली मुझे,

गिरा भी संभला भी ....सिर्फ सुकून से सोने के लिए,

क्या पता कामयाबी..... सपने में मिले मुझे,

लेकिन अभी बाकी है....उम्मीद ये कैसे भूल जाऊं,

क्योंकि उम्मीद पर तो है ...दुनिया कायम,

शायद कल ही सही... मैं बनाऊंगा नए आयाम ।।।