27.12.09

एक पहल


एक पहल

क़दम दर क़दम बढ़ते चले हम...
रास्ता कठिन था मगर ना रूके हम
था हौंसला भी और साथ में जुनून था
मगर कहना किसको ये तो दिल की लगी है
देर से सही पर ये आग भी जली है
हवाएं तक चलीं पर ये बुझ ना सकी है
कपकपी भी छूटी पर वो थम सी गयी है
समाज की बुराई अब किससे झुपी है
रास्ता बड़ा था और लम्बा भी मिला है
मगर चलना मुझको पगडंडी पर पड़ा है
प्रण भी किया और संकल्प भी लिया है
समाज की बुराई मिटाने का जिम्मा किया है
की है पहल और पूरा भी करेंगे
अपने इस सफरनामे को एक नाम दिया है
एक पहल.....एक पहल ।।।

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