27.12.09

स्लमडॉग मिलिनेयर



स्लमडॉग मिलिनेयर

ये ग्लानि है या फिर कोई कहानी है,
ये कैसी निशानी है जो तमाचों की ज़ुबानी है,
देश पर करें नाज़ या क्या कहें आज,
इसने तो बनाया ये देश कमियों का सरताज,
क्या है ये राज़ कोई तो बताए आज,
अगर ये बनाता कोई हिन्दुस्तानी फिल्म-
तो फिर आलोचक कितने करते उस पर ज़ुल्म,
नकारते, धित्कारते, और फटकारते...
उसे कभी ना दोबारा...
ये फिल्म बनाने की सलाह दे मारते
नीचा दिखाया भी और गिराया भी,
पर ये शाने तिरंगा झुका-2 सा फहराया भी,
ये जय हमारी है-
या इसमें किसी ने नीयत मारी है,
रहमान ने कितनी अच्छी बनाई है धुन,
हमने कहा तू सुन-तू सुन-तू सुन ।
Daniel Boyle की ये नई कहानी,
हमारे लिए है कितनी पुरानी,
अब तो ये जिसने भी देखी,
उसने हमारी छवि ऐसी ही मानी,
सच में कितनी दर्दनाक है ये कहानी,
क्या देश पर करें नाज़,
या फिर क्या कहें आज,
कौन है वो ?
और कैसे तैयार करता है पैमाने...
लेकिन एक बात तो तय है,
कि हमसे कहीं ज़्यादा हैं वो सयाने।।

No comments: