काश के मैं एक समाचार होता।।।काश के मैं एक समाचार होता,
दुनिया भर में मुझपर विचार होता,
क्षण-भर में पहुंच जाता मैं घर-घर,
लोगों को देता ख़बरें तत्पर,
लोग बातें करते मुझ पर,
वो जानते मुझसे और भी बेहतर,
देश ही नहीं विदेश में भी मेरा नाम होता
काश के मैं एक समाचार होता।।
दूरदर्शन को पुराने लोग जानते थे बेहतर,
नई पीढ़ी को कुछ भी नहीं लगा बेहतर,
सोचा रूप बदलूं और बन जाऊं पुराने से बढ़कर,
दिखाया मैंने उनको सनसनी और वारदात जी भर,
लोगों ने कहा, ख़ून खराबे से काश तुझे दूर पाया होता,
ऐसे स्वरूप में तू बदक़िस्मत कभी भी ना आया होता,
मैंने सोचा था –
देश ही नहीं विदेश में भी मेरा नाम होता,
काश के मैं एक समाचार होता,
लोगों का मुझपर विचार होता।।
कभी राजनीति की, कभी रंगमंच की...
और कभी खेल जगत की सैर कर आता हूं,
लेकिन फिर आने के बाद...
ये सारी ख़बरें आप ही को तो सुनाता हूं,
तभी मौसम में गर्मी और सर्दी से बचने के लिए...
सिर्फ आप ही को बताता हूं ।
माना कि, कभी दुख बन कर पहुंचा
और कभी सुख बनकर छाया मैं,
पर थोड़ा सा सहमा और थोड़ा सा घबराया मैं,
कैसे बताऊं मैं तुमको यही है रूप मेरा,
जैसा तुम चाहते थे वैसा ही बनाया है मैंने स्वरूप मेरा,
कभी अच्छा कभी बुरा तुमने ही तो बनाया मुझे,
क्यों अब भी ये लगता है ?
लोग समझ ना पाए मुझे,
परन्तु मेरी हर बात का समाज पर असर होता है,
तभी तो कोई हस्ता है और कोई रोता है,
मैंने सोचा था –
देश ही नहीं विदेश में भी मेरा नाम होता,
काश के मैं एक समाचार होता,
लोगों का मुझपर विचार होता।।