8.2.10

26\11



26\11

आंखें हैं नम, दिल में है ग़म,
है बाक़ी अंदर आग,
जो करेगी आतंकियों को बर्बाद,
मिट जाएगी सरों पर से ये काली छाया,
होगा हर बच्चे पर अब मां का साया,
होंगे सब खुश...
मिट जाएंगे सबके दुख,
सबकी होगी एक जैसी कहानी,
क्योंकि नापाकों को पड़ेगी....
अब मुंह कि खानी,
हिन्द का है, अब एक ही नारा,
हां, जिसे हमने नाम दिया है...

26\11

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