
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।।
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता ,
क्यों हर सच पर भारी पड़ता है...
क्रिकेट से इसका रिश्ता,
कितने पीछे लगे कितने साथ हुए...
कुछ रूठे तो कुछ नाराज़ हुए..
कभी भगवान बोला तो कभी यूं ही कह दिया
कभी प्यार दिया, तो कभी सब कुछ ले लिया
लेकिन ये तो हमेशा से अपनी ज़िन्दगी जिया
भला कोई ये बताए...
ऐसा करके सचिन ने क्या बुरा किया...
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।
जब से शुरू किया खेल,
सबको मुरीद बना दिया,
बच्चे, बूढ़े और जवान
सबको देखने का नया नज़रिया सिखा दिया
अब खेल...सिर्फ खेल नहीं रहा ...
इसने इसे रण कर सब कुछ अकेले सहा
कभी ताज बना,कभी रीढ़ बना
कभी जान तक दे डाली
इसने तो सिर्फ क्रिकेट खेला...
नहीं सुनी किसी भी आलोचक की गाली...
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।
कई सदियों में जो एक बार जन्म ले
वो सचिन कहलाता है...
खुद से नहीं सिर्फ अपने खेल से ही
ये भगवान भी कहलाता है...
कभी-कभी तो ये रोज़ ही कीर्तिमान बनाता है
लेकिन ऐसा नहीं है...
कि इस पर बुरा दौर नहीं आता है
लेकिन भवंर में से हर बार
बाहर आती है कश्ती जिसकी
ऐसा निडर सिर्फ सचिन ही बन पाता है
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।
अपने जज़्बे से सचिन ने रनों का अंबार लगा दिया
ना कोई तोड़ पाए वो ऐसा कारनामा कर दिया
विरोधियों को भी ये सपनों में दिखता है
उनके सपने तोड़ ख़ुद को हक़ीक़त करता है
हर पल जो साथ दे...
वो उसका साथी M.R.F कहलाता है
कभी खुश होकर...तो कभी इतराकर
ये अपने बल्ले को दर्शकों में लहराता है
वाह सचिन ...
तू हर बार सबको अपना कायल कर जाता है
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।
कभी शंहशाह, कभी बादशाह बना
कभी blaster, को कभी Dependable कहा
जब ज़ख्मी हुआ तो थोड़ा सा थम गया,
लेकिन उसकी आंधी में सब कुछ रम गया,
हीरा तो सिर्फ हीरा है
चमकना ही उसका काम है
वाह रे सचिन।
तू सच में ही जीता जागता भगवान है
सच में सचिन है या कोई फरिश्ता।।



