21.12.09

मेरी कहानी





मेरी कहानी...

ये कैसा उफान है.... और कौन सा तूफान है,


मन कुछ विचलित..... और थोड़ा परेशान है,

आज सुबह से ही.... मन नहीं लग रहा

दिलो दिमाग पर छाया.... कोई शैतान लग रहा,

थोड़ा काम भी किया... पर छुटकारा ना पाया,

जब हताश हुआ फिर से... तो लगा जैसे वो साया ही बन आया,

सोचता हूं..नाकामयाबी की इस काली परछाई से कैसे पीछा छुड़ाऊं,

कौन सा करूं जतन...जो उसकी कै़द से अपने को बचाऊं,

सोचा कभी भागू यहां से.... या सब कुछ भूल जाऊं,

पर कोई ये तो बताए...कि इस सच्चाई से मैं कैसे पीछा छुड़ाऊं,

अच्छा या बुरा..... सब किस्मत का खेल है,

पर ये नाचीज़ तो.... हमेशा हुआ इस खेल में फेल है,

टूटा भ्रम मेरा भी ....जब सामने खाई मिली मुझे,

गिरा भी संभला भी ....सिर्फ सुकून से सोने के लिए,

क्या पता कामयाबी..... सपने में मिले मुझे,

लेकिन अभी बाकी है....उम्मीद ये कैसे भूल जाऊं,

क्योंकि उम्मीद पर तो है ...दुनिया कायम,

शायद कल ही सही... मैं बनाऊंगा नए आयाम ।।।

3 comments:

pratyush said...

nice my story

pratyush said...

ek pahale is beautiful & slumdog is a real story of india

abhinav said...

nice work